देशभक्ति शायरी

तिरंगा शायरी

हरियाली हर तरफ लहलहाने दो
मेरे देश को महान कहलाने दो
तिरंगा है वतन की आन बान शान
इसे हर गली हर घर फहराने दो

विजय गाथा शहीदों की ये हिंदुस्तान गाता है
उन्हीं की ही बदौलत आज आजादी से नाता है
बड़ी शान से लहरा रहा है अपना तिरंगा
जो उन्हीं बलिदानियों की शान के किस्से सुनाता है

आंच आती है कभी जब आन पर
खेल जाते हैं हम अपनी जान पर
मर मिटेंगे देखना फिर एक दिन
ऐ तिरंगे हम तुम्हारी शान पर

केसरिया रंग है शक्ति का परिचायक
सफेद से बहती प्रेम की गंगा है
हरे से होती समृद्धि चहुँ और
हिंद राष्ट्र की शान तिरंगा है

स्वाधीनता का उत्साह पूर्वक उल्लेख करते हैं
हृदय से आपके मस्तक पर अभिषेक करते हैं
ध्वजारोहण के लिए बुलाकर मंच पर आपको
तिरंगे के नीचे देश प्रेम का आवेश भरते हैं

मिलकर आपस में स्नेह स्पंदन करते हैं
मौन वाणी से हृदय में गुंजन करते हैं
संकल्पकृत हों भव राष्ट्र के लिए
तिरंगे के आगे झुक कर राष्ट्र वंदन करते हैं

वतन के लिए जीने वालों को
भारत भूमि पर जन्नत मिलती है
जब तिरंगा हाथ में होता है
तो हिम्मत मिलती है

 

शहीदों के ताबूत से लिपटकर
वतन परस्ती का फर्ज निभाता है
लहराता है जब हिमालय की चोटी पर
किसी की शहादत का कर्ज़ चुकाता है

 

आनंद पुलकित होकर आंखों से प्रेमाश्रु बरसाएं
आपसी वैर भाव मिटा कर एक दूसरे को गले लगाएं
आओ मिलकर वन्दे मातरम की गूंज के साथ
राष्ट्रीय एकता का परिचायक तिरंगा फहराएं

 

आजादी का यह दिन शहीदों के नाम करें
सर उठा कर तिरंगे को सलाम करें
वतन के वास्ते कुछ कर करने का लेकर संकल्प
आओ आवाज से आवाज मिलाकर राष्ट्रगान करें

 

अब ना हो मुल्क़ में कोई दंगा कभी
और मैली ना हो अब ये गंगा कभी
आओ हम सब मिलकर खाएं कसम
झुकने ना देंगे अब ये तिरंगा कभी

 

जिनके हाथों से तिरंगा सम्भाला ना जाए
ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए
अपने इस देश को इक बात बतानी है मुझे
आस्तीनों में कोई सांप ना पाला जाए

राष्ट्रीय एकता देशभक्ति शायरी

 

यूँ ही नहीं इस देश में
खुशियों के चमन खिलतें है
जरा आँख उठाके देख ऐ विश्व
यहाँ दीप नहीं दिल जलतें हैं

 

जो ना अब तक हुआ कर दिखाएंगे हम
नफ़रतों को दिलों से मिटायेंगे हम
अपने हिन्दोस्तां को ख़ुदा की कसम
फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे हम

 

हिन्दू की नहीं ये मुसलमान की नहीं है
है हिन्द जिसका नाम ये शहीदों की ज़मी है

 

ज़मी कहती है मैंने प्यार सबको प्यार से बांटा
अनाज का इक इक दाना भी आदर और सत्कार से बांटा
मेरे नादान बेटों ने मेरे टुकड़े किये ऐसे
क़लम की नोक से बांटा लहु की धार से बांटा

 

घर में एक हों तो
पड़ोसी भी एक हो जाता है
एक होने की ताकत को देख
दुश्मन भी नेक हो जाता है

 

भारत का हर वासी कोई टीपू कोई बिस्मिल है
भारत माता के दुश्मन को बातें ये समझानी है
हम सब मिलकर आओ चलो ये आज यहाँ ऐलान करें
हिंदू मुस्लिम बाद में हम पहले हिन्दूस्तानी हैं

 

किसी को धर्म प्यारा है 
किसी को ईमान प्यारा है 
मगर मेरा धर्म और ईमान यही है 
मुझे तो मेरा हिंदुस्तान प्यारा है

 

कौम को कबीलों में मत बाँटिये
यह सफ़र चंद मीलों में मत बाँटिये
एक नदी की तरह है हमारा वतन
इसे नालों और झीलों में मत बाँटिये

 

वन में पंछी अनेक हैं पर ठिकाना एक है
सबकी भाषाएं भिन्न भिन्न हैं पर तराना एक है
दिल में हो अगर प्यार तो सारा जमाना एक है
हम शिकारी भिन्न भिन्न हैं पर निशाना एक है

 

सब धर्मों को समान होने दो
मेरे देश को महान होने दो
अब मस्ज़िद में पढ़ी जाने दो गीता
और मंदिर में अज़ान होने दो

 

दीवाली में अली बसे
राम बसे रमजान
ऐसे ही उज्ज्वल रहे
मेरा प्यारा हिंदुस्तान

 

यही आगाज़ है मेरा यही अंदाज है मेरा
मैं शायर हुँ दिलों को जोड़ने का काम है मेरा
वतन पर आंच जब आये सरों को पेश कर देना
हर हिंदुस्तानी को यही पैगाम है मेरा

 

हाथ एक दूसरे से मिलाकर कहो 
गैर को भी गले से लगाकर कहो 
हम हैं भारत के भारत है हमारा घर
सर झुकाकर नहीं सर उठाकर कहो

देशभक्ति बलिदान शायरी

आज़ादी को ज़ीने वालो हमें नहीं पता 
कब सूरज छिपता है तो कब दिन चढ़ता है
पर पन्ने पलट कर देखना अतीत के
हर आजादी से पहले मरना पड़ता है

नाम उसका ही जुबां पर आता है
इतिहास भी उसी का लिखा जाता है
मिटा दी जिंदगानी वतन के लिए जिसने
वही आजादी का इंकलाब लाता है

 

खून देते रहे जो चमन के लिए
हो गए जो हवन खुद हवन के लिए
उन शहीदों को मेरा नमन है
जो जिये और मरे बस वतन के लिए

 

तमन्ना है जहां सारा ये हिंदुस्तान हो जाए
दुआ करता हुँ हर एक आदमी इंसान हो जाए
मगर यह बात सच होगी तभी जाकर कहीं
की जब प्रेम ही गीता प्रेम कुरान हो जाए

रणभूमि शूरवीरों की जान होती है
कुर्बानी शहीदों की महान होती है
यूँ तो करोड़ों लोग आते जाते हैं इस दुनिया में
पर ये वो योद्धा है जिनसे हिंदुस्तान की पहचान होती है

 

तुम्हारे दिल में रहता जो वही अरमान दिल में है
मेरा मज़हब कोई भी हो मगर इमान दिल में है
मुझ पर यह कृपा की है कलम दे करके ईश्वर ने
मोहब्बत शायरी में और हिंदुस्तान दिल में है

 

स्वदेश प्रेम का गीत सुनाता हुँ
सबको अपना मीत बनाता हुँ
देशहित में हो आचरण मेरा
ऐसी कोई रीत चलाता हुँ

 

तूने चाहा नहीं हालात बदल सकते थे
मेरे आँसू तेरी आँखों से निकल सकते थे
हादसे इतने ज्यादा है वतन में अपने
की खून से छपके अख़बार निकल सकते थे

जिन्हें ख़ौफ़ हो ज़ुल्म से लड़ने का
कुर्बानी का जज़्बा नहीं आता
मर जाये बेशक इत्तफाक मौत से
देश के लिए मरना नहीं आता

थे साधारण पर इरादे उनके बड़े बहुत थे
डरे नहीं बेशक दुश्मनों के दण्ड कड़े बहुत थे
तिरंगा उठाकर वतनपरस्ती का दावा करने वालो
दे दी परिवार तक की कुर्बानियां ऐसे वीर ज़ुल्म से लड़े बहुत थे

ये हक ये कानून यूँ ही नहीं मिले हमें
इस आजादी के पीछे बहुत बड़ी कुर्बानी है
आओ मिलकर जयघोष करें नेक कामों केलिए
देशभक्तों की शहादत की कीमत अभी चुकानी है

दरो दीवार से हसरत पे
नज़र करतें हैं
ख़ुश रहो अहले वतन
हम तो सफ़र करते हैं

जुनून ही तो था देशभक्ति का 
वरना जवानी लुटाता कौन 
अहमियत ही तो थी नयनो में देश की 
वरना खुद को मिटाता कौन

 

अपनी जान के दुश्मन को भी 
हम अपनी जान कहते हैं
मुहब्बत की इसी मिट्टी को 
हिन्दुस्तान कहते हैं

 

लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज़ आयेगा
मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा 
मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा

देश की हालत देशभक्ति शायरी

बताएं जो देश की जर्जर हालत
तो पत्थर भी आंसु बहाने लगेंगे
इंसानियत जो खो गई है किसी भीड़ में
इसे ढूंढने में ज़माने लगेंगे

 

इंसानियत की बात करने वाले सारे इंसान नहीं होते
वतनपरस्ती का शोर मचाने वाले वतन पर कुर्बान नहीं होते
ऐसी दलीलें देने वालों में ही होती असलियत
तो आज वतन में अपने इतने हैवान नहीं होते

 

नाम पर मजहबों के लड़ लड़कर
यूँ ही सड़को पर बहा दोगे
सरहदों ने अगर लहू मांगा
तो दोस्तो सरहदों को क्या दोगे

 

यही आगाज़ है मेरा यही अंदाज है मेरा
मैं शायर हुँ दिलों को जोड़ने का काम है मेरा
वतन पर आंच जब आये सरों को पेश कर देना
हर हिंदुस्तानी को यही पैगाम है मेरा

 

कुछ लोग ज़माने में दानिस्ता शरारत करते हैं
आवाम की बातें करते हैं 
सूबों के हित गिनवातें है
जात पात की कसम दिलाकर
दंगे ख़ूब करातें हैं

 

सच्चे वतन परस्तों की कमी खलने लगी है 
जवानी देश के नशे में ढलने लगी है 
अपने देश का खाकर कर रहे थाली में छेद
वतन की आबो-हवा अब बदलने लगी है

 

खुद के हिंदुस्तानी होने की बात बता रहे हैं
अपने आपको नेक दिल साफ दिखा रहे हैं
जिस वंदे मातरम के बोलने से जागती है वतन परस्ती
उसे ये लोग अपने मज़हब के खिलाफ बता रहे है

 

चिढ़ाने के लिए श्रीराम की जयकार करने लगे 
नाराजगी में अल्लाह बोलकर तकरार करने लगे
धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देने वाले वतन के रखवाले
सरेआम मुल्क को मजहब में बंटाधार करने लगे

 

नाम उसका ही जुबां पर आता है 
इतिहास भी उसी का लिखा जाता है 
मिटा दी जिंदगानी वतन के लिए जिसने 
वही आजादी का इंकलाब लाता है

 

राष्ट्रीय एकता को तार तार कर दे 
ऐसे वाकिया घटने लगे हैं 
क्या करें आम जगहों की बात 
संसद में भी ईश्वर अल्लाह बंटने लगे हैं

देशप्रेम शायरी

ए खुदा धूप को रंगीन सा आंचल कर दे
दिल से उठता है धुंआ जो उसे बादल कर दे 
नफरतें लूट रहीं हैं तेरी दुनिया की बहार
इस संसार को अब इश्क में पागल कर दे

 

श्री गणेश में करूँ राष्ट के वंदन से
वंदे मातरम के ज्योतिर्मय अभिनंदन से
लिए भावना भव राष्ट्र की वंदन करता हूँ
सबसे पहले मित्रों मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं

 

गीत आंसू पोंछ कर सृजन के गा रहा हुँ
मां भारती के दर्द को मैं आप तक पहुंचा रहा हूं
सार मेरी साधना का शेष रहना चाहिए 
मैं भले मिट जाऊं मेरा देश रहना चाहिए

 

चिरागों के सफर में दबदबा हो आंधियों का
तो फिर अंजाम जुल्मत के सिवा कुछ भी नहीं है
यह दुनिया नफरतों की आखिरी स्टेज में है
इलाज इसका मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं है

 

नाम पर मजहबों के लड़ लड़कर
यूँ ही सड़को पर बहा दोगे
सरहदों ने अगर लहू मांगा
तो दोस्तो सरहदों को क्या दोगे

 

दुनिया के सब पीर पैगंबर
यही संदेश सुनाते हैं 
प्रेम से मजलिस सजती है 
नफरत से मरघट बनते हैं

 

जो ना अब तक हुआ कर दिखाएंगे हम
नफ़रतों को दिलों से मिटायेंगे हम
अपने हिन्दोस्तां को ख़ुदा की कसम
फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे हम

 

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