Yoga Shayari | योग पर शायरी

Yoga Shayari | योग पर शायरी:

योग पर शायरी

रुग्णता भरे युग का आज कठिन दौर है
आपाधापी भरे जीवन में अनेकों मोड़ है
आओ मिलकर आज योग को अपनाएं
योग ही सफल जीवन का जोड़ है

योग स्वास्थ्य का मूल आधार है
छोटे से जीवन का महान विस्तार है
योग की पूर्णता को जाना जिसने
उसी के लिए सर्व सुखों से भरा संसार है

माना कि संसार कीचड़ भरी तलैया है
मगर पुरुषार्थ करने वालों ने कब माना है
कीचड़ में भी कमल उगा देता है वो
यौगिक क्रियाओं से जिसने स्वयं को जाना है

जीवन का सुंदर आकार बनाता है
नासमझ को समझदार बनाता है
प्राणायाम से रिदम में चलती है सांसे
योग इंसान का स्वयं से साक्षात्कार कराता है

संसार के महान यज्ञों को साकार करता है
विषम परिस्थितियों को स्वीकार करता है
योग को अर्पित कर दिया जीवन जिसने
वही युगों युगों योगी तैयार करता है

हर सुबह एक नई उमंग लाती है
भीनी भीनी भोर की सुगंध आती है
बरसती है नियामतें कायनात की
ख़ुशदिल नेक जिंदगियां हुस्न पाती हैं

ख़ुद की ग़लतियों से चलना सीख
मुहब्बत से सबकी झोलियां भरना सीख
क्या रखा है पत्थरों की इस बेअसर इबादत में
असर चाहता है तो ख़ुद की इबादत करना सीख

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