मंच पर बुलाने के लिए खूबसूरत शुरुआत शायरी

मंच पर बुलाने के लिए खूबसूरत शुरुआत शायरी

सबसे पहले सभी भावी मंच संचालकों, प्रेरकों, वक्ताओं को मेरी ओर से सादर प्रणाम और देखिए जहां तक मेरा अनुभव है, मैं आपको दिशा देने का प्रयास करूंगा।
ज्यादातर हम लोग देखते हैं कि जब हमारा कोई भी कार्यक्रम शुरू होता हैं उसमें साज सजावट साउंड हर चीज लग जाती है ।और उसके बाद भी एक एंकर उस कार्यक्रम के आरंभ होने के इंतजार में रहता है। यानी कि जब कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पहुंच जाए या विधिवत रूप से शुरू करना हो तभी एक एंकर अपने आप को स्टेज पर लेकर आता है।
दोस्तों इस से भी अच्छा हो सकता है ।अगर आप कार्यक्रम के विधिवत रूप से शुरू होने से पहले मंच पर चले जाएं ।और आज का शुभ दिन यानी कि आज हमारा कार्यक्रम है और इस दिन पर आप चंद पंक्तियां बोलो माहौल को बनाने की कोशिश करो। जितने लोग आए हुए हैं या कुछ अतिथियों का इंतजार है यानी कि माहौल बेशक थोड़ा बिखरा हुआ है अभी आप मंच पर जाकर बोलना शुरू करो माहौल को बनाने की कोशिश करो उस में फायदा यह होगा कि आप अपने आप को इस आधे घंटे में या 20 मिनट में अपने आपको आत्मविश्वास से भर लोगे ।और ऐसे आपके बोलने के दौरान ही अतिथि आ जाते हैं तो आप के कार्यक्रम की कड़ी से कड़ी जुड़ती जाती है ।
इसलिए सबसे पहले आप यह ध्यान रखें कि जब साउंड लग चुका है ,माइक सेट हो चुका है। उस समय आप मंच पर जाकर बोलना शुरू कर दें अच्छे से जितने भी लोग हैं उनके उनके साथ संवाद करने की कोशिश करें या उनको प्रांगण में बैठने के लिए कहे ,कोई अच्छी सी शायरी बोले ।

सबसे पहले सभी भावी मंच संचालकों, प्रेरकों, वक्ताओं को मेरी ओर से सादर प्रणाम और देखिए जहां तक मेरा अनुभव है, मैं आपको दिशा देने का प्रयास करूंगा।
ज्यादातर हम लोग देखते हैं कि जब हमारा कोई भी कार्यक्रम शुरू होता हैं उसमें साज सजावट साउंड हर चीज लग जाती है ।और उसके बाद भी एक एंकर उस कार्यक्रम के आरंभ होने के इंतजार में रहता है। यानी कि जब कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पहुंच जाए या विधिवत रूप से शुरू करना हो तभी एक एंकर अपने आप को स्टेज पर लेकर आता है।
दोस्तों इस से भी अच्छा हो सकता है ।अगर आप कार्यक्रम के विधिवत रूप से शुरू होने से पहले मंच पर चले जाएं ।और आज का शुभ दिन यानी कि आज हमारा कार्यक्रम है और इस दिन पर आप चंद पंक्तियां बोलो माहौल को बनाने की कोशिश करो। जितने लोग आए हुए है या कुछ अतिथियों का इंतजार है यानी कि माहौल बेशक थोड़ा बिखरा हुआ है अभी आप मंच पर जाकर बोलना शुरू करो माहौल को बनाने की कोशिश करो उस में फायदा यह होगा कि आप अपने आप को इस आधे घंटे में या 20 मिनट में अपने आपको आत्मविश्वास से भर लोगे ।और ऐसे आपके बोलने के दौरान ही अतिथि आ जाते हैं तो आप के कार्यक्रम की कड़ी से कड़ी जुड़ती जाती है ।
इसलिए सबसे पहले आप यह ध्यान रखें कि जब साउंड लग चुका है ,माइक सेट हो चुका है। उस समय आप मंच पर जाकर बोलना शुरू कर दें अच्छे से जितने भी लोग हैं उनके उनके साथ संवाद करने की कोशिश करें या उनको प्रांगण में बैठने के लिए कहे ,कोई अच्छी सी शायरी बोले तो ये चंद शायरी आप बोल सकते हैं।

मुद्दत से आता हर दिन
ज़िन्दगी में नई उम्मीद जागे
आज का दिन बख्शे खुशियां आपको
नेक कामोंसे सबके नसीब जागे

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दिन निकला हर दिन जैसा
पर आज का दिन कुछ ख़ास हो
अपने लिए तो जीते हैं रोज
आज सबके भले की अरदास हो

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ग़र ख़ुद के साथ ज़ीना आ जाये
टूटे हुओं के ज़ख्मो को सीना आ जाये
हर पल बरसती है नियामतें कायनात की
बस हर दिन की मुबारक देना आ जाए

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ख़ुद से हो जाये मुहब्बत ऐसा कुछ इज़ाद करें
ख़ुद के ही विचारों से ख़ुद को आबाद करें
नफरत छोड़ आज के दिन मना लें खुशियां इतनी
कल ना रहें तो पंछी भी चहक चहक कर याद करें

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हर सुबह एक नई शुरुआत लाती है
पुरे दिन के नेक संकल्प सजाती है
जिसने जाना हर दिन है होता शुभ
ये सुबह उसी को ख़ूबसूरत बनाती है

 

इस ख़ास उत्सव को कुछ इस तरह मनाकर देखें
अपनों की तरह गैरों को भी अपना बनाकर देखें
ऊँचे ओहदे,ज़ागीर, क़ारोबार से तो सज गये
आज से जिंदगी को नेक नियति से सजाकर देखें।

 

हर दिन में एक नई सौगात देकर जाता है ,एक नई उपलब्धि देकर जाता है ।जरूरत है हम लोगों को जागरुक होने की ।सब की खुशी में खुशी मनाने की भावना हमें सफलता की ओर लेकर जाएगी । हम लोग चंद लम्हों में अपने कार्यक्रम को विधिवत रूप से आरंभ करेंगे ।तब तक सभी अनुशासन के साथ अपना अपना स्थान ग्रहण करें।

 

आज के दिन को सर झुकाकर करें सज़दा
मन की उमंगों को पँख लग जायेंगे
भर लिया ख़ुद को दुआओं से इस दिन
तो दूसरों के लिए भी दुआ कर पाएंगे

 

अंदाज़ ऐसे हों की किसी के गले का हार बन जाए
जिस महफ़िल में चले गए वो महफ़िल परिवार बन जाए
किसी ख़ास त्यौहार पर ही जाने क्यों होती हैं खुशियां
जीना ऐसा हो की अपना हर दिन त्यौहार बन जाए

 

आज के इस पावन दिन काम दिल से अभिनंदन करते हैं सभी को बुलंदियां मिले ,सफलता मिले। इसी अरदास के साथ हम आज का दिन उत्सव के रूप में मना रहे हैं ।जब तक हमारे अतिथि आते हैं, आप सभी से विनती है कि अपना अपना स्थान ग्रहण करें।

 

इसी के साथ आज की हमारी सुबह बहुत ही अच्छी हुई है ।आज का हमारा दिन सभी के भले के लिए हो ।सभी की खुशियों के लिए हो। परमात्मा ने सभी को जीवन बख़्शा है, खुशियां बख़्शी है ।तो आज का दिन हमारे लिए प्रेरणादायक रहेगा
ये दो पंक्तियां

मंच संचालक के लिए शायरी

 

सवेरा होते ही दुनिया आबाद होती है। पलके खुलते ही इस दिल में तुम्हारी याद होती है
खुदा करे भर जाए तुम्हारा दामन ख़ुशियों से
हमारे लबों पर बस यही फ़रियाद होती है

 

हर मायूस को हंसाने का
कारोबार है अपना
दिलो का दर्द खरीद लेते हैं
बस यही रोजगार अपना

 

गिर गिर गिरके यारों मुझको खूब संभलना आता है
जलकर बुझना आता है बुझ कर जलना आता है
अपने ही किस्मत लिखता हूं खुद अपने ही हाथों
मुझको सारी महफिल का अंदाज बदलना आता है

 

तुमको मिल सकता है मुझसे बेहतर तो
हमको मिल सकता है तुमसे बेहतर
लेकिन तुम और हम ग़र मिल जाएं तो
कुछ और नहीं हो सकता इससे बेहतर

 

दिले बीमार सही हो वो दवाएं दे दे
मैं सब पे प्यार लुटाऊं वो दुआएं दे दे
ऐ रब मैं साँस साँस में महक जाऊं
मेरी आवाज़ की खुशबू को वो हवाएं दे दे

 

वक्त की पाबंदियों का किस्सा तमाम करता हुँ
आज की शाम आपके नाम करता हुँ
खुशियों से भरी महफ़िल के चमकते सितारो
सर झुका के सबको मुहब्बत भरी सलाम करता हूँ

 

खिलखिलाती इस महफ़िल के सितारो
आपके लिए दिल में सम्मान बहुत है
मेरे हुनर को देखकर जाना आज
बेशक बच्चा हुँ पर इरादों में जान बहुत है

 

हंसना हंसाना आदत है मेरी
हर किसी को दिल में बसाना आदत है मेरी
लोग तो मुँह फेर कर चले जाते हैं
आवाज़ देकर बुलाना आदत है मेरी

 

ना कोई अरमान रखता हुँ
ना कोई फ़रमान करता हुँ
तहज़ीब से सुनो तो सुनने वालों का
दिलो जान से सम्मान करता हुँ

 

भंवर से निकलकर किनारा मिला है,
जीने को फिर से एक सहारा मिला है,
बहुत कशमकश में थी ये ज़िंदगी मेरी,
उस ज़िंदगी में अब साथ तुम्हारा मिला है।

 

हार अपनी खुद को कबूल ने नहीं दूंगा
बेहोशी में आज तुझे भूलने नहीं दूंगा
अपनी तालियों से इस मंच को हौसला देते रहना
सच कहता हूं आज का दिन तुम्हें भूलने नहीं दूंगा

 

किसी ने जिंदगी का मसायक समझा
तो किसी ने मुझे आदमी बेहूदा नालायक समझा
एहसानमंद आप रहनुंमाओ का
जो आपने इस महफ़िल के लायक समझा

 

मेरे अंधे ख़्वाबो के उसुलों को तराजू दे दे
मेरे मालिक मुझे मेरे जज्बातों पे काबू दे दे
मैं समंदर भी ना लूँ किसी गैर के हाथों से
इक कतरा भी समंदर है जो तू दे दे

 

कारीगर हूँ साहब अल्फ़ाज़ों की मिट्टी से
महफिलों को सजाता हूँ। कुछ को बेकार
कुछ को कलाकार नज़र आता हू

 

शांत-शांत बैठे रहोगे तो
कैसे बनेंगी कहानियां
कुछ तुम बोलो कुछ हम बोले
तभी तो बनेंगी शायरियाँ

 

जिंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना
पांव बख़्शे है तो तौहफ़े के सफर भी देना
गुफ़्तगू तूने सिखाई है मैं गूंगा था
अब मैं बोलूंगा तो बातों में असर भी देना

 

दहलीज पर रख दी किसी शख्स ने आंखें
रोशन कोई दीया इतना तो नहीं हो सकता
तू मेरी आवाज से आवाज मिला दे
फिर यह देख की दुनिया में क्या हो नहीं सकता

 

ज़िंदगी में न कोई राह आसान चाहिए
न कोई अपनी ख़ास पहचान चाहिए
बस एक ही दुआ माँगते हैं रोज भगवान से
आपके चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान चाहिए

 

माटी का पुतला हूं
पर आपसे जुदा नहीं
कोई गलती होतो माफ करना
इंसान हूं खुदा नहीं हुँ

 

आंधियों से ना बुझुं ऐसा उजाला हो जाऊं
वो नवाजे तो जुगनू से सितारा हो जाऊं
एक कतरा हूं मुझे ऐसी सिफ़त दे मौला
कोई प्यासा नजर आ जाए तो दरिया हो जाऊं

 

रंग भरने से कोई तस्वीर नहीं बोलेगी
मौत दिखती है पर मुँह नहीं खोलेगी
माना कि मेरी आवाज मैं अमृत तो नहीं है
पर मेरी आवाज जहर भी नहीं घोलेगी

 

सबकी ख़ुशी में हो मेरी ख़ुशी
ऐसा मुझे नज़रिया दो
सबके चेहरे पर ला सकूँ ख़ुशी
ऐसा कोई ज़रिया दो

मंच संचालन भाषण शुरू समापन शायरी

 

मिलते ही खुशी यहां विलीन हो जाती है 
किस्मत यहां जागते ही सो जाती है 
इस शहर में देखी है अनोखी इक बात 
यहां सुबह के साथ शाम हो जाती है

 

प्यार के समंदर की सतह मिल जाए 
काश आपके दिल में जगह मिल जाए
नहीं भूलूंगा आपका ये मोहब्बत भरा साथ 
अगर कुछ पलों के लिए आपकी पनाह मिल जाए

 

ज़िन्दगी में कायदा खास चाहता हुँ 
रहनुमाओं को दिल के पास चाहता हुँ
बस इतनी सी गुजारिश है आपसे 
कुछ पल आपका साथ चाहता हूं

 

चाहे ईश्वर अल्लाह रब ख़ुदा का नाम लेता हुँ
मगर दिलों में अमन को अपनी आवाम कहता हुँ
मेरी इन नसीहतों को मैं भी जीवन में उतारूँगा
इस वादे के साथ अपनी वाणी को विराम देता हुँ

जय हो

 

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